बाल्मिकी रामायण एवं तुलसीदासजी कृत श्री रामचरित मानस के अनुसार चैत्र मास क शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि एवम पुनर्वसु नक्षत्र एवम अभिजीत मुहूर्त में मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी का जन्म हुआ था । इसे रामनवमी भी कहा जाता है। इस साल रामनवमी 27 मार्च 2026 दिन शुक्रवार को है।  भगवान राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। कहा जाता है कि त्रेता युग में उन्होंने धर्म की पुनर्स्थापना के लिए अवतार लिया था।श्रीरामजी 14 कलाओं से युक्त थे एवम श्रीकृष्ण 16 कलाओं से युक्त थे। श्रीराम जी सत्यनिष्ठ एवम कर्तव्य पारायण थे।  रामनवमी के दिन भगवान राम की पूजा और आराधना करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है।
रामजी के जन्म समय ग्रहों की स्थिति बहुत शुभ थी रामजी का जन्म कर्क लग्न पुनर्वसु नक्षत्र एवम अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। रामजी के जन्मकुंडली में पांच ग्रह - सूर्य, मंगल, बृहस्पति, शुक्र और शनि अपनी उच्च राशि में स्थित थे।श्रीराम जी जन्म अभिजीत मुहूर्त दोपहर में हुआ था अर्थात राम जी का जन्म दोपहर में हुआ था।
राम नवमी का त्यौहार के दिन क्या करें..

रामनवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्यकर्म के बाद सूर्य देव को इसके बाद पूरे दिन नियम और संयम के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम का व्रत किया जाता है। इसके साथ ही राम दरबार यानी भगवान श्रीराम के सहित लक्ष्मण, माता सीता और हनुमान जी की पूजा और आरती की जाती है। और प्रसाद बांटते हैं। इस दिन रामचरित मानस का पाठ सुंदरकांड एवम रामरक्षा स्त्रोत का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि राम नवमी के दिन उपवास रखने से जीवन में सुख समृद्धि शांति आती है और पाप एवम बुराइयों का नाश होता है। 


राम जन्म की संक्षिप्त कथा
बाल्मिकी रामायण के अनुसार भगवान रामजी का अवतार त्रेता युग में हुआ था। अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्रेष्टि यज्ञ करवाया और यज्ञ से अग्निदेव प्रगट होकर के खीर दिया। वह खीर राजा दशरथ ने अपनी प्रिय पत्नी कौशल्या को दे दिया। कौशल्या ने उसमें से आधा हिस्सा कैकेयी को दिया इसके बाद दोनों ने अपने हिस्से से आधा-आधा खीर तीसरी पत्नी सुमित्रा को दे दिया। इस खीर के सेवन से चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र एवं कर्क लग्न में माता कौशल्या की कोख से भगवान राम का जन्म हुआ। इसी तरह कैकेयी से भरत तो सुमित्रा ने लक्ष्मण और शत्रुघ्न को जन्म दिया।


रामनवमी तिथि की ज्योतिषीय विवेचना एवम ज्योतिषीय योग


नवमी तिथि का प्रारम्भ- 26 मार्च 2026 दिन गुरुवार को सुबह 11:48 से प्रारम्भ होगी एवम 
नवमी तिथि का समापन- 27 मार्च 2026 दिन शुक्रवार को सुबह 10:06 में होगा।

रामनवमी पूजा मुहूर्त 27 मार्च 2025 दिन शुक्रवार 
सुबह का मुहूर्त: 11:14 से दोपहर 01:41 तक। 
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:02 से 12:51 तक।
राम नवमी मध्याह्न का क्षण- दोपहर 12:32 तक।


इस दिन नवग्रहों की स्थिति इस प्रकार रहेगी
सूर्य एवम शनि मीन राशि में स्थित रहेंगे चंद्रमा अपनी स्वराशि कर्क में स्थित रहेंगे  मंगल बुध एवम् राहु कुंभ राशि में स्थित रहेंगे शुक्र मेष राशि में स्थित रहेंगे एवम केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे।


रामनवमी व्रत का निर्णय 
श्रीरामजी का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी तिथि कर्क लग्न कर्क राशि पुनर्वसु नक्षत्र एवम अभिजीत मुहूर्त में हुआ था सूर्योदय काल में 27 मार्च दिन शुक्रवार को मिल रही है और इसी दिन पुनर्वसु नक्षत्र भी मिल रहा इस कारण 27 मार्च दिन शुक्रवार को रामनवमी का व्रत करना उत्तम रहेगा।

 

पंडित आशीष तिवारी